छतरपुर - देश एवं विदेशों में कथक नृत्य की प्रस्तुतियों के पुरोधा और नामचीन हस्तियों में शुमार दीपक महाराज ने कहा कि देश में जो बड़े नृत्य उत्सव आयोजित किए जाते हैं उनमें खजुराहो नृत्य समारोह भी शामिल है। खजुराहो नृत्य आयोजन का स्तर बहुत ऊंचा है। खजुराहो आकर प्रस्तुति देना और प्रतिभा का सम्मान दिखाना हर कलाकार की तमन्ना होती है। यहां आकर उन्हें न सिर्फ मंच मिला अपितु उन्हें अत्याधिक प्रसन्नता भी मिली है।
दीपक महाराज ने कहा कि खजुराहो आकर वह खुद को गौरांवित महसूस कर रहे हैं। मेरे लिए खजुराहो आने का आमंत्रण बड़ी इज्जत एवं गौरवशाली सम्मान मिलने जैसा है, तो वहीं इस बार के मंदिर प्रांगण के आयोजन में कथक की प्रस्तुति प्रस्तुत करना सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि आंगन कोई भी हो कार्य अच्छा होना चाहिए। कथक, नृत्य, क्लासिकल नृत्य, शास्त्री नृत्य इन सभी पौराणिक नृत्यों में भारतीय संस्कृति की कथाएं एवं गाथाएं छिपी हैं।
इस विधा के हमारे गुणी पूर्वजों का अतुल्नीय योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि आदर्णीय बिरजू महाराज की तपस्या, साधना को देखते-देखते उनके हृदय में परिवर्तन हुआ और वो भी इस विधा से जुड़ गए। उनकी पहली प्रस्तुति पर दर्शकों की असीम दुआएं और प्यार मिला, जिससे उन्हें मेरे होने का अहसास मिला। वह क्षण उनके जीवन का अविस्मरणीय है।
तबलावादक प्रियांशु चतुरलाल।

दीपक महाराज के तबलावादक प्रियांशु चतुरलाल ने कहा कि मंदिर के प्रांगण में प्रस्तुति देकर उन्हें आत्म प्रसन्नता मिली है और वह खजुराहो आकर गौरांवित हुए हैं। खजुराहो के निवासी बहुत ही मिलनसार और कला के जिज्ञासु भी हैं। उन्हें अपने दादा जी से प्रेरणा मिली जो हिन्दुस्तान के पहले तबलावादक रहे हैं। उन्होंने 7 वर्ष की उम्र में यूएसए में पहले कार्यक्रम में हिस्सा लिया और वह 21 साल से विभिन्न कार्यक्रमों में तबलावादक की भूमिका निभा रहे हैं।    

न्यूज़ सोर्स : खजुराहो महोत्सव का स्तर बहुत ऊंचा है