मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार की ब्रांडिंग केंद्र के पैसे से होगी. प्रदेश के विकास के लिए राज्य सरकार को पैसे की ज़रूरत है और यह काम केंद्र की मोदी सरकार की मदद के बिना पूरा नहीं हो सकता. सीएम कमलनाथ ने अपने मंत्रियों को यह बात समझा दी है. इसलिए अब प्रदेश का मंत्रिमंडल दिल्ली के चक्कर काट रहा है, ताकि प्रदेश को 'फील गुड' कराया जा सके.

मंत्रियों की दिल्ली दौड़

मोदी सरकार ने केंद्रीय अंश में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी में छब्बीस सौ करोड़ की कटौती कर दी थी. केंद्र के उस रवैए पर तब तीखे तेवर दिखाने वाली कमलनाथ सरकार का रवैया अब नरम हो गया है. अब वह फिर से केंद्र से मदद की उम्मीद लगाए बैठी है. इसी आर्थिक मदद की आस में कमलनाथ सरकार के मंत्रियों के सुर बदलने लगे हैं. आठ महीने बाद भी खाली खजाने से परेशान 'कमलनाथ एक्सप्रेस' को अब मोदी सरकार की मदद वाले इंजन की ज़रूरत है. मुख्यमंत्री के निर्देश पर सरकार के मंत्री एक के बाद एक दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं.

MP मांगे MORE!

मध्य प्रदेश में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं पर अमल के लिए करोड़ों रुपए की ज़रूरत है. सरकार को मनरेगा के लिए 306 करोड़ रुपए की सख़्त ज़रूरत है. इसके साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 55 बड़े पुलों की मंजूरी के लिए भी पैसा चाहिए. खेलों के लिए 78 करोड़ रुपए की जरूरत है. केन्द्रीय संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री प्रहलाद पटेल से पर्यटन को बढ़ावा देने में केंद्रीय मदद की दरकार है. प्रदेश में घने जंगलों की सुरक्षा के लिए कई प्रस्ताव लंबित हैं. साथ ही उपकर और अधिकार से जमा राशि में राज्य को बराबरी की हिस्सेदारी से पैसे की मांग भी कमलनाथ सरकार कर रही है.

गृह मंत्री अमित शाह से गृह विभाग के नए सेटअप के लिए 880 करोड़, केन्द्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में खाद्यान्न कोटा बढ़ाने, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावट से पेयजल कार्यक्रम के लिए 548.09 करोड़ रुपए राज्य सरकार मांग रही है. इसके अलावा सरकार स्मार्ट सिटी और भोपाल-इंदौर में मेट्रो सहित अन्य विभागों से जुड़े प्रस्ताव केंद्र को मंज़ूरी के लिए भेज रही है.


नहीं बन रही बात

मतलब साफ है कि बार-बार बाजार से कर्ज़ लेने के बाद भी बात नहीं बन रही है. केंद्र की मदद के बिना कमलनाथ सरकार का बेड़ा पार नहीं हो सकता. हालांकि, केंद्र ने साफ कहा है कि नियम प्रक्रिया के तहत ही केंद्र सरकार राज्यों को पैसा जारी करती है. सत्ता में आने के बाद से कमलनाथ सरकार दर्जन बार से ज़्यादा कर्ज़ ले चुकी है, लेकिन वो भी नाकाफी साबित हुई है. केंद्र की मदद के बिना उसकी ब्रांडिंग मुश्किल है.