पीथमपुर  प्रतिभा सिंटेक्स लिमिटेड पिछले 20 वर्षों से पीथमपुर में टेक्सटाइल उद्योग मे एक नामी एक्सपोर्ट यूनिट है। जिसमें धागे से लेकर गारमेंट्स बनाने तक का सम्पूर्ण कार्य किया जाता है।

1997 में एक प्लांट से शुरू हुए उद्योग के वर्तमान में 6 प्लांट हो चुके है।इस विकास के बाद भी कंपनी के श्रमिक 7000 से लेकर 9000 में ही अपना जीवन यापन करने को मजबूर है। दिन प्रतिदिन बढ़ती महंगाई और कम तनख्वाह से त्रस्त होकर गारमेंट यूनिट के करीब 2000 श्रमिको ने उद्योग में कोई श्रमिक यूनियन ना होने के कारणवश अपने प्रतिनिधि चुनकर कुछ बुनियादी मांगों को लेकर मांग पत्र श्रम पदाधिकारी को दिनांक 03/03/18 को दिया गया।मांग पत्र के संबंध में कई बैठक हुई लेकिन मांगो पर गौर करने के बजाए कपनी द्वारा 76 श्रमिको को बिना किसी ग्रह जांच के सिर्फ बदले की कार्यवाही करते हुए जून माह में बर्खास्त कर दिया गया एवं 2000 श्रमिकों को लॉक आउट कर दिया गया।
इस अन्यायपूर्ण कारवाही के सामने श्रमिको ने सर झुकाने के बजाए संघर्ष का रास्ता चुना और दिनांक 01/07/2018 से सड़क और न्यायालय में  संघर्ष शुरू किया।
 
दिनांक 20/7/18 को श्रमायुक्त द्वारा मांग पत्र को औद्योगिक ट्रिब्यूनल को रेफेर कर दिया गया।उक्त रिफरेन्स में  श्रमिको द्वारा अपने अभिभाषक के माध्यम से दिनांक 08/08/2018 को स्टेटमेंट ऑफ क्लेम पेश किया साथ ही 76 बर्खास्त श्रमिको के संबंध में और 2000 श्रमिको के लोक आउट के संबंध में क्लेम के साथ दो I A भी पेश की गई।

कंपनी द्वारा लेबर कमीशनर के द्वारा किये गए रिफरेन्स के विरुद्ध रिट पेटिशन दायर की गई और प्रार्थना की गई कि रेफरेन्स अवैध है और युक्तियुक्त न होने के कारण खारिज किया जाने योग्य है।कपनी की प्रार्थना को अस्वीकार  करते हुए सिंगल बेंच ने  07/01/2019 को आदेश पारित किया और औद्योगिक ट्रिब्यूनल को जुरिसडिक्शन के प्रश्न पर विचारण के लिए योग्य पटल माना।

कंपनी द्वारा सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ डबल बेंच में रिट अपील दायर की गई  जिसमे सिंगल बेंच के आदेश को यथावत रख अपीलार्थी की प्रार्थना को अस्वीकार किया गया।

दिनांक 03/05/2019 को औद्योगिक ट्रिब्यूनल ने कंपनी के lockout को अवैध घोषित कर श्रमिको को पुनः कार्य पर लेने एवं पिछला बकाया वेतन का आदेश दिया है।
 
कंपनी की पूरी कोशिश यही थी किसी भी तरह ज्यादा से ज्यादा समय प्रकरण को लंबित रखा जाए जिससे आर्थिक तंगी का शिकार होने पर श्रमिक अपना हिसाब खुद ही ले ले या हमारे द्वारा बनाये गए बंधपत्रो  पर हस्ताक्षर कर कार्य करे।इस लड़ाई में कई श्रमिको को   अपने परिवार के जीवन यापन के लिए, होम लोन भरने के लिए पीथमपुर तक छोड़ना पड़ा, कई श्रमिको को अपने गांव वापस लौटना पड़ा।लेकिन इन विपरीत परिस्थितियों में भी अधिकांश श्रमिक संघर्षरत रहे।

प्रतिभा सिंटेक्स के श्रमिकों की इस जीत में अधिवक्ता बी एल नागर ,मोहन निमजे जी,धर्मपाल अधिकारीजी,सर्यवंशीजी एवं पीथमपुर की अधिकांश यूनियनों की अहम भूमिका है।.                     इस संबंध में जब प्रतिभा सिंटेक्स कंपनी के हरिशंकर झा से बात करना चाहिए तो वह उपलब्ध नहीं हुएl मुकेश व्यास का मोबाइल बंद मिलाl संजय जैन से मोबाइल नंबर 98260 28 990 पर कोर्ट के फैसले के बारे में बात की तो उन्होंने कहा हम मीटिंग में बैठे हैं बाद में बात करेंगेl