गर्मी के मौसम में तेज धूप न केवल त्वचा को झुलसाती है, बल्कि गर्मियों में सूरज से निकलने वाली हानिकारक अल्ट्रावायलट किरणों शरीर के साथ आंखों पर भी बुरा असर डालती है। अक्सर लोग तेज धूप में घर से बाहर निकलने से पहले चेहरे को तो कॉटन के कपड़े से तो कवर कर लेते हैं, लेकिन आंखों का बचाव करना भूल जाते हैं। गर्म मौसम में हानिकारक यूवी किरणों से आंखों को बचाना बेहद जरूरी है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश कुमार ने बताया कि इन किरणों के संपर्क में आने से और धूप में ज्यादा देर रहने से आंखों में एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है।

क्योंकि आंखों को दिमाग से जोड़ने वाली बारीक नसें आंखों की त्वचा के बहुत नजदीक होती हैं। जो कि बहुत ही ज्यादा नाजुक होती हैं, इसलिए ज्यादा देर धूप में रहने से आपकी आंखों को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि आंखों में चुभन, जलन या कोई धूल कण चला जाता है। ऐसे में कुछ लोग फौरन ही आंखों को रगड़ने लगते हैं। ऐसा करने से आंखों को कई तरह के नुकसान होते हैं। इस प्रकार की समस्या होने पर आंखों को कभी रगड़ना नहीं चाहिए। अगर आंखों में किसी तरह की दिक्कत हो तो साफ रुमाल या कपड़े से से हल्के हाथों से साफ करें।

 

आंखों को ठंडे पानी से धोएं

 

 

धूप से लौटने के बाद शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इसलिए पहले शरीर को धीरे-धीरे सामान्य तापमान पर आने दें। इसके लिए पंखे के नीचे पांच मिनट तक बैठ जाएं। इसके बाद ठंडे पानी से चेहरे और आंखों को अच्छी तरह धोएं। आंखों पर ठंडे पानी के छींटे मारें और फिर मुलायम तोलिये से चेहरा पोछें। अगर आंखों में जलन ज्यादा है और आंखें लाल हैं। तो बर्फ से आंखों की सिंकाई करे।

बाहर निकलने से पहले धूप के चश्मे का करे प्रयोग

 

 

डॉ. दिनेश ने बताया कि धूप का चश्मा सूरज से निकलने वाली घातक यूवी किरणों से आंखों की रेटीना को बचाने का काम करता है। तेज धूप के कारण आंखों की रोशनी पर असर पड़ने के साथ ही धूल के कण रेटिना को नुकसान पहुंचता है। साथ ही तेज धूप में यूवी किरणों से आंखों के ऊपर बनी टीयर सेल की परत टूटने या क्षतिग्रस्त होने लगती है।

 

यह स्थिति कॉर्निया के लिए हानिकारक हो सकती है। आंखों के कॉर्निया को भी यूवी किरणों से उतना ही नुकसान पहुंचता है जितना रेटीना को। इसलिए हमें धूप में निकलते वक्त धूप के चश्मों को प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा हमें सड़क पर बिकने वाले चश्मों से भी दूरी बनानी चाहिए।