नौगांव। नवोदय विद्यालय भले ही किसी भी तरह की रैगिंग से इनकार करता हो लेकिन विद्यालय के भीतर हर साल रैगिंग होती है क्योंकि सीनियर छात्र अपनी मनमानी करते हैं और जूनियर उनकी मनमानी का शिकार होते हैं। यदि प्रबंधन से शिकायत की जाती है तो प्रबंधन सिर्फ समझाईस देकर मामले को सुलझाने का दावा करता है। यदि मामला सुलझ गया होता तो आधा सैकड़ा छात्र छतरपुर शिकायत करने के लिए न निकले होते। हालांकि बाद में पुलिस के हस्ताक्षेप के बाद मामला शांत हो गया। रात भर कई जूनियर बच्चों को सीनियर छात्रों ने कमरे में बंद कर जमकर मारा था। 
सूत्रों का कहना है कि कुछ सीनियर छात्रों ने जूनियर छात्रों को प्रताडि़त किया जब उन्होंने प्राचार्य से शिकायत की तो प्राचार्य ने सीनियर छात्रों को समझाइश देकर छोड़ दिया। शिकायत से बौखलाए सीनियर छात्रों ने रात 10 बजे से 3 बजे तक कमरे में बंद कर जूनियर छात्रों की जमकर पिटाई की। मारपीट से आहत कक्षा 9वीं के जूनियर छात्रों को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में उपचार दिया गया। चूंकि सीनियर छात्रों पर ठोस कार्यवाही नहीं हुई थी इसलिए आक्रोशित आधा सैकड़ा जूनियर छात्र दीवार फांदकर छतरपुर शिकायत करने निकल आए थे तभी प्राचार्य आरके सैजवार ने डायल 100 को सूचना दी। सूचना मिलने पर डायल 100 ने छतरपुर रोड स्थित बुन्देलखण्ड गौशाला के पास छात्रों को रोका और वापस नवोदय विद्यालय पहुंचाया। यहां सवाल यह उठता है कि यदि प्रबंधन की लापरवाही न होती तो फिर इतनी संख्या में छात्र कैसे बाहर निकलते। टीआई याकूब खान ने भी छात्रों को समझाया जिससे मामला शांत हो सका। प्राचार्य आरके सैजवार बताते हैं कि आपस में बैठकर मामला सुलझाया जा रहा है। रैगिंग की कोई बात नहीं है।