छतरपुर। शहर के निजी स्कूलों में किताबों के नाम पर हो रही लूट के मामले में अब तक सख्त नजर आ रहे जिला शिक्षा अधिकारी संतोष शर्मा ने यू टर्न लेते हुए निजी स्कूलों के सामने समर्पण कर दिया है। सोमवार को उन्होंने नाराज अभिभावकों के एक प्रतिनिधि मण्डल से कहा कि वे जिले के प्राइवेट स्कूलों द्वारा की जा रही एनसीईआरटी की गाईड लाईन की अनदेखी एवं महंगी किताबों के विक्रय मामले में कुछ नहीं कर सकते। श्री शर्मा ने कहा कि वे स्कूलों को पत्र भेज चुके हैं फिर भी स्कूल इस मामले में कोई कदम नहीं उठा रहे हैं इसलिए अब आगे की कार्यवाही के लिए कलेक्टर को पत्र लिखेंगे। 

 

उल्लेखनीय है कि पिछले 15 दिन से जिला मुख्यालय पर प्राइवेट स्कूलों द्वारा किताबों के नाम पर की जा रही लूट का विरोध किया जा रहा है। निजी स्कूल एनसीईआरटी की गाईड लाईन के विरूद्ध निजी प्रकाशकों द्वारा किताबें छपवाकर अपने यहां चला रहे हैं। एक-एक विषय की चार-चार किताबें थोपकर जहां बच्चों के बचपन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है तो वहीं तीन हजार से पांच हजार रूपए की किताबें बेचकर अभिभावकों को भी लूटा जा रहा है। तीन सौ रूपए कीमत की किताबें तीन हजार में बेचकर 50 प्रतिशत तक कमीशन खाकर ये स्कूल प्रतिवर्ष लाखों रूपए कमा रहे हैं। इसी बात का विरोध करते हुए अभिभावकों ने दो अप्रैल से एक अभियान चलाया था जिसको लेकर लगातार जिला शिक्षा अधिकारी से मिलकर शिकायतें की गईं। इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी स्कूलों को पत्र लिखकर उनके द्वारा चलाई जा रही किताबों की जानकारी मांगी थी एवं एनसीईआरटी की गाईड लाईन का पालन करने के निर्देश दिए थे। जिला शिक्षा अधिकारी के इन पत्रों के बावजूद किसी निजी स्कूल ने इन आदेशों का पालन नहीं किया। सोमवार को जब अभिभावक दोबारा अपनी नाराजगी व्यक्त करने डीईओ कार्यालय पहुंचे तो डीईओ संतोष शर्मा ने साफतौर पर कैमरे के सामने कहा कि स्कूल उनकी बात नहीं मान रहे हैं और उन्हें स्कूलों की मान्यता खत्म करने का कोई अधिकार नहीं है इसलिए अब वे स्कूलों की परीक्षण रिपोर्ट कलेक्टर मोहित बुंदस के पास भेजेंगे और कलेक्टर से अनुशंसा पत्र लिखाकर स्कूलों के मान्यता बोर्ड सीबीएसई एवं आईसीएससी को भेजेंगे। स्कूलों की मान्यता के संबंध में अगला कदम सीबीएसई बोर्ड को ही उठाना है। 

लेनदेन की चर्चाएं गर्म
शहर के हजारों अभिभावकों से किताबों के नाम पर की जा रही लाखों रूपए की लूट के इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी संतोष शर्मा का यह निरीह बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा है कि निजी स्कूलों ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से साठगांठ कर इस खेल को जारी रखने की व्यवस्था कर ली है। अब देखना ये है कि कलेक्टर मोहित बुंदस इस मामले में क्या फैसला लेते हैं।