भोपाल । पिछले दिनों मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमल नाथ के करीबियों को निशाना बनाकर आयकर विभाग ने छापे मारे। छापे में भले ही कमल नाथ और उनके करीबी पाक-साफ साबित हुए हों, लेकिन यह छापा अब तक के इतिहास में सबसे अलग रहा। आयकर विभाग ने हवाला कारोबार से जुड़े अश्विनी शर्मा पर शिकंजा कसने के लिए सोशल मीडिया और गूगल मैप का सहारा लिया। गौरतलब है कि आयकर विभाग ने प्रदेश में 281 करोड़ रुपये के अवैध धन के रैकेट का पता लगाया, और 14.6 करोड़ रुपये की बेहिसाबी नकदी बरामद जब्त की है। आयकर विभाग ने इस पूरे छापे में मोबाइल तकनीक ने कमाल की भूमिका अदा की है। आयकर विभाग में उच्च पदस्थ सूत्र ने ईएमएस को बताया कि संपूर्ण कार्रवाई में स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और गूगल अलर्ट ने आयकर विभाग के काम को बेहद आसान बना दिया। 
सूत्रों का कहना है कि अश्विनी शर्मा लग्गजरी लाइफ जीने का आदि है। इसी कारण वह गलत कामों में लिप्त हो गया। अश्विनी बेरोकटोक किसी भी अफसर और नेताओं से मिलते रहता था। बड़ी पार्टिंयां करता, और इन फोटो को सोशल मीडिया में शेयर करता था। अश्विनी ने फेसबुक में कई नामी अफसरों के साथ फोटो शेयर की थी। इसी बात से नाराज वल्लभ भवन के वरिष्ठ आईएएस अफसर ने अश्विनी को समझाया था। इसके बाद ही अश्विनी ने फेसबुक एकाउंट डिलीट कर दिया था, लेकिन तभी से आयकर विभाग की सोशल मीडिया विंग अश्विनी पर नजर रख रही थी। आयकर विभाग के अफसर तकनीक का सहारा लेकर अश्विनी की लोकेशन ऑनलाइन ट्रेस कर रहे थे। वह कहां जाता है, कब जाता है? 

सोशल मीडिया से तीसरी नजर...
आयकर विभाग ने 1 अप्रैल से प्रोजेक्ट इनसाइट लागू किया है। एक हजार करोड़ रुपये खर्च कर यह प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसके जरिये सरकार विश्व का सबसे बड़ा बॉयोमेट्रिक डाटाबेस तैयार कर रही है। इसके तहत आयकर विभाग के अफसर सोशल मीडिया पर निगरानी कर रहे हैं। अफसरों का कहना है कि लोग जो भी खरीदते हैं, घूमते-फिरते हैं, अपनी लग्जरी लाइफ को सोशल मीडिया में शेयर करते हैं। सोशल मीडिया पर लोग अक्सर अपने महंगे स्थानों पर घूमने-फिरने, देश-विदेश के किसी पांच सितारा होटल में रुकने, महंगी गाड़ी-बाइक खरीदने पर पोस्ट करते हैं। जबकि यही लोग टैक्स जमा करते समय अपनी आय कम दिखाते हैं। भोपाल में अश्विनी शर्मा के साथ भी ऐसा ही हुआ। 
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आपका स्मार्टफोन दे रहा खबर...
आजकल हर कोई स्मार्टफोन का प्रयोग कर रहे हैं। अधिकांश समय इंटरनेट ऑन भी रहता है। आयकर विभाग संदिग्ध लोगों की गतिविधि को लगातार मॉनिटर करता है, वह कहां-कहां जाते हैं। गूगल लोकेशन को बंद कर देते हैं, फिर भी गूगल की आप पर नजर बनी रहती है। अश्विनी शर्मा की शिकायत के बाद आयकर विभाग ने उसके फोन के माध्यम से लगातार उसकी गतिविधि को जांचा। उल्लेखनीय है गूगल मैप्स से रियल टाइम ट्रैकिंग संभव है। फाइंड माय फ्रेंड के जरिए यह पता किया जा सकता है कि संबंधित व्यक्ति  किस रास्ते से जा रहा है। 

उपग्रह का सहारा...
आयकर विभाग पूरे देशभर में तकनीक का सहारा ले रहा है। 2 अप्रैल को गाजियाबाद में भी उपग्रह की मदद से 15 करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी। यहां व्यावसायिक कांप्लेक्स को सड़क से दूर कृषि भूमि दिखाकर बेच दिया था, लेकिन आयकर विभाग के अधिकारियों ने हैदराबाद स्थित नेशनल रिमोट सेंसिंग एजेंसी (एनआरएससी) से उपग्रह की तस्वीरें मांगी तो पता चला कृषि भूमि पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान था।

जबलपुर में छापे के बाद सतर्कता
आयकर विभाग के सूत्रों ने बताया कि शुरुआती अप्रैल में आयकर विभाग की इंवेस्टीगेशन विंग ने जबलपुर में खूबचंद लालवानी के 4121 करोड़ के हवाला रैकेट का भंडाफोड़ किया था। इसके बाद से ही कुछ लोगों पर आयकर विभाग ने नजर रखनी शुरू कर दी थी। विभाग को आशंका थी कि लालवानी के जरिये करोड़ों रुपया हवाला के जरिये इधर-उधर किया गया है।