बेंगलुरु । वॉट्सऐप कंपनी पेमेंट डेटा को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के गाइडलाइंस पर अमल की तैयारी कर रही है। इससे पहले उसने भारतीय यूजर्स के पेमेंट डेटा को केवल देश में ही स्टोर करने की मांग का विरोध किया था। फेसबुक की कंपनी वॉट्सऐप के पेमेंट फीचर का नाम वॉट्सऐप पे है। इसका फरवरी से ट्रायल चल रहा है। अभी तक भारत में यह केवल 10 लाख यूजर्स तक सीमित है क्योंकि इसके लिए रेगुलेटरी अनुमतियां नहीं मिली हैं।
फेसबुक के एक सीनियर एग्जिक्यूटिव ने बताया, 'हम आरबीआई की गाइडलाइंस का पालन करने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए इंजीनियरिंग से जुड़ा कुछ काम बचा है।' इसका मतलब है कि भारतीय यूजर्स का फाइनेंशियल डेटा रखने वाले सर्वर देश में ही मौजूद होंगे। अभी तक अमेरिकी कंपनी भारत में पेमेंट डेटा की कॉपी रखने और उसे विदेशी सर्वर पर स्टोर करने की अनुमति मांग रही थी। हालांकि, भारतीय रेगुलेटर्स इस मामले में छूट देने को बिल्कुल तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि वॉट्सऐप को भारतीय यूजर्स से जुड़े सभी फाइनेंशियल डेटा को स्टोर करने के लिए सभी सर्वर को भारत में ही रखना होगा। आरबीआई ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट में दिए एक शपथपत्र में बताया था कि वॉट्सऐप ने उसकी ओर से बनाए गए डेटा लोकलाइजेशन नॉर्म्स का पालन नहीं किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने कहा, 'वॉट्सऐप को यह समझ आ गया है कि इससे बचने का कोई रास्ता नहीं है। हालांकि, हमारे पास अभी तक उसकी लिखित सहमति नहीं है।' वॉट्सऐप पे का डिजाइन यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) पर चलने के लिए बनाया गया है। इससे यूजर्स को अपने बैंक एकाउंट्स के जरिए एक-दूसरे के साथ और बिजनेस ट्रांजैक्शंस करने की अनुमति मिलेगी।
आरबीआई ने शपथपत्र में कहा था कि वह डेटा लोकलाइजेशन से जुड़े नॉर्म्स के पालन में तेजी लाने के लिए रेगुलेटरी कार्रवाई पर विचार कर रहा है। हालांकि, वह इसे लेकर भी सतर्क है कि इससे कंज्यूमर के ट्रांजैक्शन के एक्सपीरिएंस पर बुरा असर न पड़े। वॉट्सऐप के लिए भारत 20 करोड़ से अधिक मंथली एक्टिव यूजर्स के साथ सबसे बड़ा मार्केट है। पेटीएम और फोन पे के अलावा वॉट्सऐप की पेमेंट सर्विस का मुकाबला गूगल की गूगल पे से भी होगा। वॉट्सऐप ने हाल ही में ईजटैप के फाउंडर अभिजीत बोस को भारत में अपना हेड नियुक्त किया था। इनवेस्टमेंट बैंक क्रेडिट सुइस के अनुसार, देश का ई-पेमेंट बिजनेस 2023 तक पांच गुणा बढ़कर 1 लाख करोड़ डॉलर पर पहुंच सकता है।