ग्वालियर  ।करणी सेना राजनीतिक दल नही है और न ही राजनीतिक दल बनकर चुनाव लडेगी अगर करणी सेना के पदाधिकारी को कोई राजनीतिक दल लोकसभा चुनाव मे टिकट देता है तो उसे प्रदेश पदाधिकारी का पद छोडना होगा।पदवत फिल्म के विरोध के बाद से करणी सेना को असली पहचान मिली है। इस विरोध के बाद से अब कोई भी फिल्मकार राजपूतों के बारे मे गलत चित्रण करने का साहस नहीं करेगा।  यह बात करणी सेना के संस्थापक लोकेन्द्र सिंह काल्वी ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही । उन्होंने कहा कि करणी सेना के ५-६ पदाधिकारियों को लोकसभा मे टिकट देने की चर्चा चल रही है। इस बारे में करणी सेना का एक विशाल सम्मेलन ३१ मार्च को भोपाल मे होने जा रहा है। जिसमें ंकई विषयों पर चर्चा कर निर्णय लिया जाएगा। श्री काल्वी ने कहा कि देश मे आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए। हाल ही में सामान्य वर्ग के लिए लागू हुए १० प्रतिशत आरक्षण का लाभ प्रदेश के लोगों को नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने राम मंदिर निर्माण को लेकर कहा कि कोई भी राम मंदिर का निर्माण करे। लेकिन इस पर स्पष्ट नीति होना चाहिए। उन्होंने बताया कि देश के २२ राज्यों मे राजपूतों को ५०- ६० के करीब संख्या है जो चुनावों में निर्णायक भूमिका अदा कर सकती है। ऐसे कई विषयों को लेकर ३१ मार्च को भोपाल मे आयोजित सम्मेलन में चर्चा की जाएगी। इसी संबध में वह यहांं आए और समाज के लोगो से चर्चा कर उन्हें करणी सेना की रीति और नीति से विगत करा रहे है।