उज्जैन । राजाधिराज महाकाल के आंगन में रंग उत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं। पहली बार धुलेंडी पर पुजारी भगवान के साथ फूलों से होली खेलेंगे। तड़के चार बजे भस्मारती में फूल होली का आयोजन होगा। इसके लिए एक क्विंटल गुलाब के फूलों की पंखुरियां मंगवाई गई हैं।

भस्मारती करने वाले पं. महेश पुजारी ने बताया ज्योतिर्लिंग व पर्यावरण संरक्षण के लिए राजा के आंगन में प्राकृतिक होली के रंग बिखरेंगे। भगवान को हर्बल गुलाल के साथ गुलाब के फूलों की पंखुरियां अर्पित की जाएगी। इसके बाद आरती में मौजूद भक्त फूलों से होली खेलेंगे। मंदिर की परंपरा अनुसार धुलेंडी पर अबीर गुलाल से होली खेली जाती है। इस बार अबीर गुलाल के साथ फूलों का उपयोग होगा।

 

शाही होगी राजा की होली.. श्रद्धालु भी खुश

 

 

अवंतिकानाथ की शाही होली देखने के लिए देश-विदेश से सैकड़ों भक्त भस्मारती में मौजूद रहते हैं। इनमें से कई वृद्ध दर्शनार्थियों को गुलाल के अधिक उपयोग से परेशानी होती है। इसलिए इस बार गुलाल का प्रतीकात्मक तथा फूलों का बड़ी मात्रा में उपयोग होगा। इससे श्रद्धालुओं को कोई भी परेशानी नहीं होगी और वे खुशी से उत्सव का आनंद ले सकेंगे।

रंग पंचमी पर टेसू के फूलों से बनेगा प्राकृतिक रंग

 

 

धुलेंडी पर सूखी तथा रंग पंचमी पर गीले रंगों से होली खेलने का महत्व है। मंदिर की परंपरा अनुसार 25 मार्च को रंग पंचमी पर भगवान महाकाल टेसू के फूलों से बने रंग से होली खेलेंगे। पुजारी जंगलों से करीब 2 क्विंटल टेसू के फूल मंगवाकर मंदिर परिसर में प्राकृतिक रंग तैयार करेंगे।