लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आरएसएस) एक बार फिर कांग्रेस के निशाने पर है. मध्य प्रदेश में सरकारी भवनों में संघ की शाखाओं पर बैन लगाने की तैयारी कांग्रेस सरकार ने कर ली है. सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके लिए प्रस्ताव बनाना शुरू कर दिया है और हवाला दिया है अपने वचन पत्र का.

इस मुद्दे पर कांग्रेस-बीजेपी और संघ आर पार की लड़ाई में दिख रहा है. सियासत इस बात पर शुरू हो गई है कि संघ पर शिकंजा कसा गया तो बीजेपी अब सरकारी बंगलों में भी संघ की शाखाएं लगाएगी.

आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा शुक्रवार 8 मार्च को ग्वालियर में होने जा रही है, लेकिन ठीक उसके पहले आरएसएस को लेकर कमलनाथ सरकार के मंत्री ने बड़ा बयान दिया है. दरअसल कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में आरएसएस की शाखाएं सरकारी भवनों में लगाने और इनमें सरकारी कर्मचारियों के बैन का वादा किया था और अब सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके लिए बकायदा प्रस्ताव बनाना शुरू भी कर दिया है.

 मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री डॉक्टर गोविंद सिंह के मुताबिक 1000 प्रतिशत संघ की शाखाएं सरकारी भवनों में बंद करेंगे.  उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने शासकीय भवनों में आरएसएस शाखा पर बैन का वचनपत्र में जो वादा किया है उसे हर हाल में पूरा किया जाएगा. 

मंत्रियों के बंगले पर लगाएंगे शाखा: बीजेपी

जब जिक्र संघ पर बैन का होता है तो बीजेपी का तिलमिलाना लाजमी है.  ऐसे में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के तमाम नेताओं के गुस्से का गुबार कांग्रेस पर फूट पड़ा है. 

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब जवाहरलाल नेहरू संघ की शाखाओं को लगने से रोक नहीं पाए तो ये क्या कराएंगे. इतना ही नहीं बीजेपी ने तो कमलनाथ सरकार को धमकी दी है कि ऐसा हुआ तो संघ की शाखाएं कांग्रेस सरकार के मंत्रियों के बंगले और सड़क तक में लगेगी.  बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष रामेश्वर शर्मा ने तो चेतावनी देते हुए कहा कि संघ की शाखा रोकी तो मंत्रियों के घरों और बंगले में, पार्क में, सड़क पर शाखा लगेगी,  लेकिन संघ की शाखा तो लगेगी ही लगेगी.

आरएसएस पहले से ही कांग्रेस के निशाने पर रहा है.  चाहे राहुल गांधी हों या दिग्विजय सिंह लगातार संघ पर हमलावर रहे हैं. ऐसे में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस और आरएसएस का टकराव बढ़ने के पूरे पूरे आसार हैं.