रायपुर। राजधानी से सटे महज 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देवपुरी में वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू कर तेंदुए को पकड़ा है। तेंदुआ देवपुरी के पोल्ट्री फार्म से मुर्गी चुराकर खा रहा था। वन विभाग को इसकी शिकायत मिली थी। वन विभाग की टीम पिछले तीन सप्ताह से पोल्ट्री फार्म पर डेरा डाले हुई थी।

सोमवार तड़के साढ़े तीन बजे तेंदुआ मुर्गी खाने के चक्कर में फिर आया। मुर्गी के चक्कर में जैसे ही वह पिजड़े में घुसा तो पिजड़ा बंद हो गया। तेंदुए को पकड़कर नंदनवन में रखा गया है। वाइल्ड लाइफ पीसीसीएफ के आदेश के बाद उसे टाइगर रिजर्व में छोड़ा जाएगा। वन विभाग के अधिकारी का कहना है कि रहवासी इलाके में आने की वजह से जनहानि होने की संभावना थी, लेकिन कर्मचारियों की मदद से आसानी से तेंदुए को पकड़ा जा सका।
वन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक राजधानी के देवपुरी गांव में मिलिट्री के रिटायर्ड मेजर दीपक मेहता का रायल नामक पोल्ट्री फार्म था। पोल्ट्री फार्म में पिछले 22 दिनों से लगातार तेंदुए द्वारा मुर्गी के खाने की शिकायत मिली थी। संचालक द्वारा वन विभाग को इसकी जानकारी दी गई।

उसके बाद तेंदुए को रेस्क्यू करने का जिम्मा नंदनवन के कर्मचारियों को सौंपा गया था। नंदनवन की टीम वन पाल विराज मुदलियार, सुधाकर राव शिंदे और वन रक्षक गिरीश रजक की टीम पिछले 20 दिनों से देवपुरी में तेंदुआ रेस्क्यू करने वाली टीम डेरा डाले हुई थी। रेस्क्यू टीम लगातार तेंदुए को वाच कर रही थी। पोल्ट्री फार्म में तेंदुआ आता था और मुर्गी खाकर वापस लौट जाता था।
ऐसे फंसा तेंदुआ पिंजरे में

वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि तेंदुआ को सही सलामत पकड़ने के लिए वहां पर पिंजरा रखा गया था। पिजरे में दो मुर्गियां रखी गई थीं। सोमवार को तड़के साढ़े तीन बजे तेंदुआ पोल्ट्रीफार्म की बाउंड्री वाल को कूदकर पोल्ट्री फार्म में प्रवेश किया था।
टीम ने वाउंड्री वाल के पास ही पिंजरे को खोलकर रख दिया था, तेंदुआ लालच में जैसे ही पिंजरे में घुसा पिजरा बंद हो गया। तेंदुए की ताक में बैठे नंदनवन के कर्मचारियों ने तुरंत पिंजरे में ताला लगाकर इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर उसे नंदनवन भेज दिया गया है।

तेंदुए के पंजे से हुई पहचान
पोल्ट्री फार्म से लगातार तीन से चार मुर्गियां गायब हो रही थीं। पोल्ट्री फार्म में सोने वाले कर्मचारी रात में तेंदुए की आवाज सुन रहे थे। सुबह कर्मचारियों द्वारा तेंदुए के पंजे का निशान भी देखा।

कर्मचारियों ने तेंदुए द्वारा पोल्ट्री फार्म मुर्गी गायब होने की जानकारी संचालक को दी। कर्मचारियों की बात का भरोसा ना कर संचालक स्वंय रात में पोल्ट्री फार्म में आकर देखा तो उनको भी तेंदुआ दिखाई दिया उसके बाद उन्होंने तेंदुए को रेस्क्यू के लिए वन विभाग टीम को जानकारी दी थी।
20 दिन में तीन जगह बदला पिंजरा

वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि रहवासी इलाके में तेंदुआ का खुलेआम घुम रहा था। तेंदुए का रेस्क्यू करना बेहद जरूरी थी। कभी भी किसी प्रकार की अप्रिय घटना घट सकती थी। कर्मचारियों को पिछले 20 दिनों में तीन बार पिंजरे का स्थान बदलना पड़ा तब जाकर वह सही सलामत हाथ में आया। वन विभाग की टीम आस-पास जांच कर रही है।

- राजधानी से सटे देवपुरी के पास पोल्ट्री फार्म में तेंदुआ मुर्गी खाने के लिए आया करता था। आज उसका रेस्क्यू कर उसे नंदनवन में रखा गया है। - सुनील श्रीवास्तव, एसडीओ, नंदनवन