इंदौर। नगर निगम द्वारा अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लि. के नाम से वंâपनी बनाक चलाई जा रही बसों पर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं। प्रदेश प्रवक्ता प्रमोद द्विवेदी का कहना है कि जब प्रायवेट लिमिटेड के नाम पर रजिस्ट्रेशन हुआ है तो उसमें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का नाम वैâसे रखा जा सकता है। कोई प्रायवेट व्यक्ति नाम का उपयोग नहीं कर सकता है। 
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया पेनलिस्ट व प्रवक्ता एडवोकेट प्रमोद कुमार द्विवेदी ने पत्रकाररों से चर्चा के दौरान बताया कि नगर निगम द्वारा इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लि. के नाम से कारोबार शुरू करने के लिए वंâपनी अधिनियम १९५६ की धारा १४९ (३) के अनुसरण में ए १८१५९१ दिनांक २००५-१-१२-२००५ से प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया एवं निगम का प्रमाण पत्र डॉ. राजसिंह वंâपनियों का रजिस्ट्रार द्वारा ए ६०२२१ एमपी २००५ एसीसी १८१५९ के जरिये प्राप्त किया गया। सवाल खड़े हो रहे हैं कि वंâपनी कौन बनाता है, वंâपनी किस रूप में बनती है। क्या एक अद्र्धशासकीय विभाग जिस पर शासन का नियंत्रण होता है वंâपनी के रूप में रजिस्टर्ड हो सकती है और इन सबसे ऊपर अहम बिंदु यह है कि अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लि. नाम इसे दे दिया गया। 
अटल सम्मानित नेता हैं, थे और रहेंगें। वे केवल पूर्व प्रधानमंत्री नहीं थे बल्कि जननेता थे, किसी सम्मानित व्यक्ति के नाम को सम्मान देने हेतु पुल, सड़क, बंदरगाह, एयरपोर्ट, स्वूâल, महाविद्यालय आदि का, योजना का नाम रखा जा सकता है पर ये सब सरकार कर सकती है, प्रायवेट लिमिटेड वंâपनी अपने नाम के साथ ऐसे व्यक्ति का नाम नहीं जोड़ सकती। नगर निगम ने सिटी बसों के संचालन हेतु प्रा.लि. वंâपनी बनाकर जो व्यवस्था की है। इसलिए उसे अधिकार नहीं है। संपूर्ण योजना अटलश्री योजनांतर्गत नाम दिया जा सकता है। नगर निगम तत्काल इसके लिए माफी मांगे और दोषियों के खिलाफ राज्य सरकार कार्यवाही करे तथा योजना का नामकरण अटलजी के नाम पर सम्मानजनक रूप से दिया जाए न कि वंâपनी के रूप में ।