रायपुर। संपूर्ण विश्व में प्रकाश फैलाने वाले भगवान सूर्यदेव का जन्मोत्सव शास्त्रीय परंपरा अनुसार माघ शुक्ल सप्तमी को मनाए जाने का विधान है। मंगलवार को सप्तमी तिथि पर देशभर में सूर्य सप्तमी पर्व श्रद्धा-उल्लास से मनाया गया। सत्ती बाजार स्थित अंबा देवी मंदिर परिसर में भी सूर्य सप्तमी पूजा धूमधाम से संपन्न हुई।

सुबह भगवान सूर्यदेव की विशेष पूजा अनुष्ठान कर ध्वजा फहराई गई। विद्वान आचार्य के सानिध्य में विधिविधान से श्रीगणेश पूजन, सूर्य पूजन, 10 छत्रपाल देवता, भैरव देवता, नौग्रह, 16 मातृका पूजन, वास्तु देवता पूजन सहित अन्य देवी-देवताओं का पूजन किया गया।
छत्तीसगढ़ में सूर्यदेव का एक भी मंदिर नहीं

श्रीशाकद्वीपिय ब्राह्मण समाज ट्रस्ट के अध्यक्ष गोवर्धन शर्मा ने बताया कि देश के कुछ ही शहरों में भगवान सूर्यदेव का मंदिर है। छत्तीसगढ़ में एक भी सूर्य मंदिर न होने से ज्यादातर शहरों में सूर्यदेव के छायाचित्र की पूजा-अर्चना की जाती है। राजधानी का अंबा देवी मंदिर एक मात्र मंदिर है जहां पिछले 100 साल से भी अधिक समय से साल में एक बार माघ शुक्ल सप्तमी पर सूर्यदेव की पूजा-अर्चना, हवन प्रसादी का आयोजन किया जा रहा है।
समाज के इष्टदेव हैं भगवान सूर्यदेव

ट्रस्ट सचिव राकेश शर्मा ने बताया कि वैसे तो हिन्दू धर्म को मानने वाले श्रद्धालु प्रतिदिन भगवान सूर्यदेव को जल अर्पण करते हैं। बिहार के प्रमुख छठ पर्व पर भी सूर्यदेव की पूजा एवं अर्ध्य देने की परंपरा है। भगवान सूर्यदेव शाकद्वीपिय ब्राह्मण समाज के इष्ट देव हैं। सूर्यदेव का एक भी मंदिर न होने से समाज के लोग सूर्यदेव के छायाचित्र की ही पूजा करते हैं। साल में एक बार पूरा समाज अंबा देवी मंदिर में एकत्रित होता है। उत्साह के साथ हवन पूजा करके सामाजिक प्रसादी का आयोजन किया जाता है।
नए कार्य शुरू करना शुभ फलदायी

अंबा देवी मंदिर के पुजारी पं.पुरुषोत्तम शर्मा एवं यज्ञाचार्य पं.गोपाल महाराज ने बताया कि भगवान सूर्यदेव अपने भक्तों को यश, कीर्ति, मान-सम्मान, धन-दौलत, सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। सूर्य सप्तमी पर सूर्यदेव की आराधना, पूजन-हवन कर नए कार्यों की शुरुआत की जाए तो सफलता अवश्य मिलती है। बैकों से संबंधित लेन-देन और नए व्यापार, उद्योग-धंधे का शुभारंभ करने से बरकत होती है।
गुप्त नवरात्रि की सप्तमी तिथि सर्वश्रेष्ठ

यह भी मान्यता है कि शास्त्रों के ज्ञाता व धर्म कांड में रुचि रखने वाले यदि विधि-विधान से माघ शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर कालरात्रि और भगवान सूर्यदेव की पूजा करें तो अलौकिक ज्ञान की प्राप्ति होती है। तंत्र, मंत्र की सिद्धि करनी हो तो भी गुप्त नवरात्र की सप्तमी तिथि सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।