उच्चतम न्यायालय ने सरकारी आवास खाली करने के पटना उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया और उन्हें विपक्ष के नेता के लिए बने आवास में जाकर रहने का आदेश दिया।  प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता एवं न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने सरकार के फैसले को चुनौती देने के लिए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। बिहार विधानसभा में विपक्ष के मौजूदा नेता यादव ने पटना उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ यह याचिका दायर की थी। अदालत ने बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के रहने के लिए बना सरकारी आवास खाली करने के राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया था।
इससे पहले पटना हाईकोर्ट ने पूर्व उप मुख्यमंत्री एवं विपक्षी दल के नेता तेजस्वी यादव को बंगला खाली करने के मामले में किसी प्रकार की राहत देने से साफ इनकार कर दिया था। साथ ही बंगला खाली कराने को लेकर एकलपीठ के आदेश को चुनौती देने वाली अपील को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया था। जिसके बाद तजस्वी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एपी शाही तथा न्यायमूर्ति अंजना मिश्रा की खंडपीठ ने पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की अपील पर 4 जनवरी को सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। खंडपीठ ने 7 जनवरी को अपना फैसला सुनाया। हाई कोर्ट ने इस मामले में कहा कि राज्य सरकार कौन सा बंगला किसे आवंटित करेगी यह उसकी जिम्मेदारी है, इसमें हस्तक्षेप करने की कोई गुंजाइश नहीं है। 
गौरतलब है कि तेजस्वी यादव के उप मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद उप मुख्यमंत्री के नाम से आवंटित 5 देशरत्न मार्ग के बंगला को खाली करने का आदेश भवन निर्माण विभाग ने सितंबर 2016 को जारी किया था। विपक्ष का नेता बनाये जाने पर उन्हें दूसरा बंगला आवंटित किया गया, लेकिन तेजस्वी यादव ने अपने पूर्व के आवास 5 देशरत्न मार्ग को खाली नहीं करते हुए सरकारी आदेश की वैधता को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति ज्योति शरण की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद उनकी रिट याचिका को गत वर्ष अक्टूबर में खारिज कर दिया था। एकलपीठ के आदेश को एलपीए अपील दायर कर चुनौती दी गई थी।