सेक्स लाइफ का एक अहम हिस्सा है। कई कपल्स सेक्स को लेकर इतने एक्साइटेड होते हैं कि वे इसके लिए नए-नए तरीके और नई जगहें एक्सप्लोर करते रहते हैं। इसी चक्कर में कई लोग पूल या बीच किनारे भी सेक्शुअल ऐक्टिविटीज़ में लिप्त हो जाते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स की मानें तो ऐसा करना महिलाओं के प्राइवेट पार्ट के लिए खतरनाक हो सकता है। 
कई लोग सेक्स को और रोमांचक बनाने के चक्कर में वॉटर सेक्स भी करते हैं, लेकिन ऐसा करने से आपका मजा तो खराब होगा ही, साथ ही पूल के पानी में मौजूद बैक्टीरिया और अन्य कीटाणुओं से बीमारियां और इंफेक्शन भी हो सकता है। डॉ. मिलहीज़र के मुताबिक, अगर किसी को डायरिया या फिर वायरल से हुई कोई बीमारी है तो वह उसके पूल में घुसने के साथ ही पूरे पानी में फैल सकती है। ऐसे दूषित पानी में सेक्स करने से वजाइना को भारी नुकसान हो सकता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पानी में सेक्स करने की वजह से लुबरिकेशन खत्म हो जाता है। दरअसल वजाइनल लुबरिकेशन भी पानी ही होता है और जब यह पानी, पूल के पानी से मिलता है तो नैचरल लुबरिकेंट जल्दी ही सूख जाता है। डॉक्टर मिलहीज़र के मुताबिक, ल्यूब बेहद ज़रूरी है, खासकर जब आप पानी में सेक्स कर रहे हैं। ल्यूब की वजह से न सिर्फ वॉटर सेक्स अच्छा होगा बल्कि यह फटने की स्थिति से भी बचाएगा। अगर ल्यूब फट जाता है तो फिर पानी के अंदर एक पार्टनर से दूसरे पार्टनर में इंफेक्शन फैलने के ज़्यादा चांस होते हैं।
स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी में फीमेल सेक्शुअल मेडिसिन प्रोग्राम की डायरेक्टर Leah Millheiser कहती हैं कि समंदर किनारे सेक्स करने से रेत फीमेल प्राइवेट पार्ट (वजाइना) में जा सकती है। रेत चूंकि घर्षण पैदा करती है इसलिए यह अंदर जाकर वजाइना को चोट पहुंचा सकती है और इंफेक्शन का कारण भी बन सकती है। रेत की वजह से वजाइना से लेकर वल्वा तक में इरिटेशन और खुजली हो सकती है।
वॉटर सेक्स की वजह से आपको यूटीआई की समस्या भी हो सकती है। मिलहीज़र के मुताबिक, इन-आउट पेनिट्रेटिव सेक्स की वजह से भी महिलाओं में यूटीआई हो सकता है। पूल में मौजूद बैक्टीरिया यूरिनरी ट्रैक्ट के ज़रिए अंदर पहुंचकर यूटीआई को जन्म दे सकता है।