भले ही आपको यह सुनने में अजीब लगे लेकिन स्लीप ऑर्गैज्म एक हकीकत है। जब लड़कों में यह होता है तो इसे वेट ड्रीम्स या स्वप्नदोष कहते हैं लेकिन जब महिलाएं इसका अनुभव करती हैं तो इसे स्लीप ऑर्गैज्म कहते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर यह है क्या? तो हम आपको बता दें कि स्लीप ऑर्गैज्म वह स्थिति है जब कोई व्यक्ति नींद में क्लाइमैक्स का अनुभव करे और उसी वक्त उसकी नींद खुल जाए। हालांकि यह स्थिति प्यूबर्टी से गुजर रहे लड़के और लड़कियों में ज्यादा होता है या फिर जीवन के बाद के क्षणों में उस वक्त जब आप सेक्शुअली ऐक्टिव नहीं रहते हैं। 


ऐक्चुअल फिजिकल ऑर्गैज्म ही है स्लीप ऑर्गैज्म 
अब सवाल यह है कि क्या स्लीप ऑर्गैज्म सच में होता है? एक्सपर्ट्स की मानें तो स्लीप ऑर्गैज्म ऐक्चुअल फिजिकल ऑर्गैज्म ही होता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इसे अनुभव करने वाले ज्यादातर लोग नींद से जागने के बाद भी उस इरॉटिक सपने को अच्छी तरह से याद कर पाते हैं। चूंकि महिलाओं के पास उनके स्लीप ऑर्गैज्म का कोई सबूत नहीं होता लिहाजा उनके लिए इस अनुभव को एक्सपीरियंस करना थोड़ा कन्फ्यूजिंग हो सकता है। अगर यह आपके साथ हुआ है तो आप बेहतर जान पाएंगी कि वह फीलिंग क्या थी। वह सिर्फ एक सपना था या फिर आपने सच में क्लाइमैक्स महसूस किया। 


इस दौरान शरीर में होते हैं फिजियोलॉजिकल चेंज 
सेक्स रिसर्च नाम के जर्नल में प्रकाशित 1986 की एक स्टडी के नतीजे बताते हैं कि करीब 37 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं जो अपनी लाइफ में कम से कम एक बार स्लीप ऑर्गैज्म का अनुभव जरूर करती हैं। 1983 में अनुसंधानकर्ताओं ने कुछ ऐसी महिलाओं की जांच की जिन्हें नींद में ऑर्गैज्म महसूस हुआ। रिसर्च करने वालों ने पाया कि उन महिलाओं के शरीर में कुछ फिजियोलॉजिकल चेंज नजर आए। उदाहरण के लिए उन महिलाओं का हार्ट रेट 50 से बढ़कर 100 बीट्स प्रति मिनट हो गया और उनकी सांस लेने की गति भी 12 से बढ़कर 22 प्रति मिनट हो गई। साथ ही वजाइनल ब्लड फ्लो में भी बढ़ोतरी देखी गई। 

इस विषय पर बहुत ज्यादा रिसर्च नहीं हुई है 
आपको जानकर हैरानी होगी कि ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं जो हकीकत में तो ऑर्गैज्म महसूस नहीं कर पातीं लेकिन नींद में ऑर्गैज्म हासिल कर लेती हैं। ऐसा इसलिए होता है कि क्योंकि उन महिलाओं के लिए ऑर्गैज्म के दौरान शारीरिक उत्तेजना के साथ-साथ मानसिक उत्तेजना का भी शामिल होना जरूरी है। इस टॉपिक पर बहुत ज्यादा रिसर्च नहीं हो पायी है क्योंकि स्लीप ऑर्गैज्म कोई ऐसा विषय नहीं है जिसकी जांच लैब में आसानी से की जा सके। जिस किसी ने भी इसे अनुभव किया है वह जानता है कि स्लीप ऑर्गैज्म पूरी तरह से अप्रत्याशित होता है।