इन्दौर । संस्कृति मंत्री डॉ.विजयलक्ष्मी साधौ आज इंदौर में संस्कृतिकर्मियों से रूबरू हुईं। प्रेस क्लब इंदौर में आयोजित संस्कृति संवाद कार्यक्रम में कलमकारों, कलाकारों, चित्रकारों और मूर्तिकारों ने मध्यप्रदेश में नये सांस्कृतिक प्रतिमान गढ़ने के लिये अपने सुझाव दिये। मंत्री डॉ. साधौ ने खुद कागज कलम लेकर सभी सुझावों को नोट किया।
कार्यक्रम के आरंभ में सर्वश्री नवनीत शुक्ला, शशिकांत ताम्बे, सत्यनारायण व्यास, अभिषेक गावड़े, भालू मोढ़े, चिन्मय मिश्र, शोभा चौधरी, अरूण मोराने, कल्पना झोकरेकर मेघा खानवलकर और अन्य संस्कृतिकर्मियों ने मंत्री डॉ. साधौ का स्वागत किया।
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुये प्रेस क्लब अध्यक्ष श्री अरविंद तिवारी ने कहा कि इंदौर में प्रतिष्ठित सांस्कृतिक कार्यक्रमों का विगत वर्षों में पराभव हुआ। राष्ट्रीय ख्याति का लता मंगेश्कर अलंकरण समारोह अब केवल सरकारी आयोजन बनकर रह गया है। खुले मैदान में होने वाला यह आयोजन अब बंद हॉल में होने लगा है। इसका पुन: भव्य आयोजन हो, ऐसी सभी इंदौरवासियों की कामना है। श्री कीर्ति राणा ने दिल्ली के मध्यप्रदेश भवन में प्रदेश के कलाकारों के लिये कला-प्रदर्शन हेतु वीथिका की आवश्यकता जताई। श्री भालू मोढ़े ने लालबाग के दरबार हॉल में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का सुझाव दिया।
डॉ. साधौ ने कहा कि यह संस्कृतिकर्मियों से  पहला संवाद है। संस्कृति-पर्यटन का प्रभार पहले भी चार साल संभाला था, तब छत्तीगढ़ साथ था, पर्यटन का पांच और संस्कृति विभाग का बारह करोड़ बजट था। बजट कम था। संस्कृति के बिना समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। तब कम बजट में भी बेहतर काम किए। भारत भवन में कार्यक्रम किए। लालबाग की पेंटिंग का कलकत्ता की लेब से काम कराया, पत्थरों को स्टोन कैंसर हो गया था उनका ट्रीटमेंट कराया। राजवाड़ा का नवीनीकरण कराया, निमाड़ उत्सव शुरु किया। लता मंगेशकर समारोह की गरिमा कम होते जाना सोच का विषय है, एक विचारधारा तेजी से पनपी और उसने हमारी संस्कृति को प्रभावित किया। आज संस्कृति के मामले में मध्यप्रदेश धनवान है। इसे और बेहतर बनाएंगे, तो लगेगा मध्यप्रदेश की संस्कृति विद्यमान है। मंत्री सुश्री साधौ ने कहा कि गूगल युग से संस्कृति को बचाने की आवश्यकता है। भावी पीढ़ी को संस्कार- संस्कृति से अवगत कराएं।
:: यह मिले सुझाव :: 
श्री कैलाश पंवार बंधु : स्थानीय कलाकारों को सुविधा-सम्मान नहीं मिलता जबकि बाहर के बुलाए कलाकार भी वही गाते हैं जो हम सुनाते हैं। स्थानीय कलाकारों को आगे बढ़ाए। 
सलाम नौशाद : कलाकारों ने पंद्रह सालों में खूब भुगता है। आप कलाकारों की मदद करें। इंदौर के कलाकारों की मदद करें। 
मेघा खानविलकर : संस्था उत्कर्ष सहित सारी संस्थाएँ अपने खर्चे पर कार्यक्रम करती हैं । रवींद्रनाट्यगृह अब निजी हाथों में जाने से महँगा हो गया है। 
संध्या भराड़े: प्रकाशन की समस्या, स्थानीय प्रकाशक का अभाव। बाहर से कराना पड़ता है। 
कुलवंत सिंह शैरी: लिखित सुझाव दिए। 
डॉ मनीष : संस्कृति विभाग के संगीत समारोह में कलाकार चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएँ। तबलावादकों का पक्ष रख रहा हूँ। सत्यनारायण व्यास सूत्रधार इंदौर में साढे तीन सौ की केपिसिटी का हॉल चाहिए। 
सुशील गोयल: इंदौर थियेटर ऑडिटोरियम की भीषण त्रासदी है। रवींद्र नाट्यगृह का नवीनीकरण हुआ लेकिन किराया बेहद अधिक है। हैदराबाद, चैन्नई में सप्ताह में एक दिन एक रुपए पर मिलता है। स्कूलों के खाली पड़े हॉल शाम को दिए जाएं। 
नासिर जमाल : भारत भवन के नाटकों के शो इंदौर में नहीं होते, बव कारंत के वक्त होते थे। चित्रा खिडवडकर : कम किराए पर नाट्य वेशभूषा मिल सके। देवरिया भाषा विज्ञान पर काम करता हूँ। कालिदास अकादमी में डायरेक्टर नहीं, संस्कृत विवि में बाहर के लोग पदस्थ। शुभा वैद्य लोक कला के गेम्स आयोजित करें। 
प्रदीप कनिक : चित्रकार मेरा अनुरोध है कि नए कलाकारों को बढ़ावे की पॉलिसी बनाएँ। सरकार समाज उसकी मदद करे। फाईनआर्ट कॉलेज में रिक्त पद भरें जाएं। 
शोभा चौधरी : 2011 से अनुदान ले रही हूँ। इंदौर और बाहर के कलाकारों को बुलाती हूँ। अनुदान की दिक़्क़तें दूर हों। मप्र के कलाकारों को प्रदेश में एक दूसरी जगह बुलाए जाएं। 
कल्पना झोकेकर : लता समारोह से सालों से जुड़ी हूँ। कलाकारों को बुलाने-गँवाने की स्पर्धा बंद हो चुकी है। शास्त्रीय मंच के कलाकारों को मंच नहीं मिलता तो इस विधा के युवा कलाकार कैसे आगे आएँगे? समारोह में उभरते कलाकारों को मंच दें। 
हितेंद्र दीक्षित : सुश्री साधो की इस पहल को साधुवाद। अमीर खां के नाम से आज तक कोई अवार्ड नहीं, इसे इस बार से ही शुरु करें। 
प्रतिमा जोशी: संगीत की अपनी जाति है इसलिए इसमें जातिवाद नहीं हो। संजय रोकड़े निमाड़ उत्सव के बजट में स्थानीय कलाकारों के लिए कम बजट, काठी और कलगी-तुर्रा नृत्य को जिला स्तर पर करें। ऐसे कलाकार जो जीवन पर्यंत जुडे रहते है उन्हें बीमा-पेंशन लाभ दे। 
अरुण कोरान्ने : ललित कला का भवन तैयार किया जाए। 
लहरी : फ़ाईनआर्ट कॉलेज में देवलालीकर कला वीथिका को देखें। 
अवधेश यादव : भवन की छत खराब हो गई है, दीवारें अच्छी हैं। क्वालिफ़ाइड टीचर की आज तक नियुक्ति नहीं। क्षेत्रीय कला-गीत-बोलियों के संरक्षण की दिशा में काम किए जाएं। 
कीर्ति राणा : दिल्ली में बन रहे नए मप्र भवन में आर्ट गैलरी के लिए हॉल बनाया जाए। कला के लिए आने जाने वाले कलाकारों को परिवहन भाड़े में रियायत दिया जाए। अभय माँड़के युवाओं के लिए भी संगीत पुरस्कार रखे जाएं। संस्कृति कोटे में कलाकारों की भर्ती की जाए। विलास सप्रे आठ संगीत विद्यालय चार फ़ाईन आर्ट कॉलेज इनमें संगीत शिक्षक का पद सृजित करें। रियाजुद्दीन शेख : कला स्टूडियो विकसित किया जाए। 
दिव्यांश व्यास : संस्कृति विभाग के अनुदान की प्रक्रिया को सरल करें। युवा संस्कृति-भाषा से जुड़ सके इसका प्लान तैयार किया जाए। 
शशिकांत ताँबे : मुझे पुरस्कार नहीं आप सब का प्रेम मिला है। सस्ते में उपलब्ध हो सभागार, संस्कृति विभाग सुझावों पर गौर करेगा तो मप्र का सांस्कृतिक परिदृश्य बदलेगा। 
शैलेंद्र शर्मा : भारत भवन जैसा इंदौर में भी भारत भवन बनवा दीजिए। रियायती दर पर सभागार मिले, अनुदान की प्रक्रिया सरल हो, वाजिब संस्थाओं का हक ना मारा जाए, अमीर खाँ संगीत समारोह, लता अलंकरण समारोह की गरिमा लौटे। आप के विभाग और कलाकारों के बीच की संवादहीनता समाप्त हो। 
टेलीफ़ोन पर शाबाश खान : (अमीर खान के बेटे) फेस्टिवल तो होता है लेकिन एक तरह की औपचारिकता होती है। अमीर खाँ के नाम के मुताबिक फेस्टिवल नहीं हो पा रहा है।
डॉ. साधौ ने कहा कि बहुत सारी चीज़ें विभिन्न विधाओं की बात सामने आई। संवादहीनता के कारण खराब स्थिति बनती है। बातचीत होती रहे तो बहुत कुछ अच्छा सामने आता है। कलाकार दिक़्क़तों के कारण अपनी कला नहीं दिखा पाते। स्थिति बिगड़ चुकी है, सुधारने के लिए कुछ वक्त दें। मैं सुधारने के प्रयास करूँगी। कमलनाथ जी की सरकार जनता के द्वारा चुनी हुई सरकार है। हम-आप मिल-जुलकर क्या बेहतर कर सकते हैं। मप्र की संस्कृति को आप हम मिलकर बेहतर स्थिति में लाएं यह मिल कर करुंगी। मेरा निवेदन इतना ही है कि भटकती युवा पीढ़ी को संभालें।