रायपुर। बर्ड फ्लू को लेकर जिला पशुपालन विभाग पूरी तरह से अलर्ट है। सभी प्रखंड पशु चिकित्सा पदाधिकारियों को अलर्ट जारी कर दिया गया है। बर्ड फ्लू से बचने के लिए मुर्गी पालन से जुड़े लोगों को बीमार मुर्गियों के सीधे सम्पर्क में नहीं आना चाहिए। दस्ताने और अन्य सुरक्षा साधनों का प्रयोग करना चाहिए। राज्य अनुसंधान प्रायोगशाला के प्रमुख डॉ. एनके शुक्ला ने बताया कि सभी जिले में चौकसी बरती जा रही है। मुर्गी फार्म मालिकों को फार्म की समुचित साफ-सफाई की व्यवस्था करने तथा चूना व एंटीवायरल स्प्रे का छिड़काव करते रहने का निर्देश जारी किया गया है। स्थिति पर नजर रखने के लिए जिला पशुपालन पदाधिकारी की अध्यक्षता में चिकित्सकों की रैपिड रिस्पांस टीम गठित की गई है।

प्रदेश में स्थिति ठीक

हालांकि प्रदेश में स्थिति ठीक है, लेकिन बर्ड फ्लू को लेकर जन जागरूकता लाई जा रही है। जिले में कहीं भी बर्ड फ्लू की सूचना नहीं है। जिला पशुपालन विभाग स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। बर्ड फ्लू की आशंका को लेकर तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है, जो जिलेभर के मुर्गी बाड़ों की जांच कर रही है।

बर्ड फ्लू के लक्षण

मुर्गियों-पक्षियों के सिर के आसपास सूजन, आंख से रिसाव, कलगी और टांगों में नीलापन, अचानक कमजोरी व पंखों का गिरना, हरकत में कमी, कम आहार लेना, अण्डे कम देना, सामान्य रूप से अधिक मुर्गियों-पक्षियों का मरना आदि खतरे के संकेत हैं। इन लक्षणों को देखते ही बीमार पक्षियों को स्वस्थ पक्षियों से तुरंत अलग कर देना चाहिए। अन्यथा वे भी चपेट में आ सकते हैं।

फार्म में रखें सुरक्षित

बर्ड फ्लू बीमारी दूषित पानी से, बीमार पक्षी के मल-मूत्र व पंखों के जरिए पूरे झुण्ड को तेजी से फैल सकती है। इससे बचाव के लिए सावधानी आवश्यक है। मुर्गी फार्म में केवल देखभाल करने वालों को ही प्रवेश करने दें। अपने मुर्गे-मुर्गियों को दूसरे पक्षियों के सम्पर्क में न आने दें। बीमार मुर्गियों के पंख, श्लेसमा व बीट को कदापि नहीं छूना चाहिए। छू लेने पर तुरंत साबुन से हाथ धोना चाहिए। कपड़ों व जूतों को संक्रमण मुक्त रखना चाहिए।

रखें साफ-सफाई

मुर्गियों के बाड़े अथवा फार्म में तथा उसके आसपास साफ-सफाई बहुत जरूरी है। कीटाणुनाशक दवाओं,चूना व एंटी वायरल स्प्रे के छिड़काव से विषाणु व जीवाणु से बचाया जा सकता है। बर्ड फ्लू से मुर्गियों-पक्षियों को बचाने के लिए स्वच्छ एवं शीतल पेयजल तथा संतुलित आहार देना चाहिए। भोजन व पेयजल को रोजाना बदलना चाहिए, बर्तनों की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए।