रायपुर। टीवी और फिल्मों को देखकर आजकल के युवा अपने नाक, कान और चेहरे की सर्जरी कराने पहुंच जाते हैं। इसे अज्ञानता कहें या फिर जानकार मूर्ख, समझ से परे है। खास बात ये है कि कई डॉक्टर पैसों के लालच में सर्जरी कर देते हैं। सर्जरी के बाद उक्त मरीज के मस्तिष्क पर पड़ने वाले प्रभाव की ओर कोई ध्यान नहीं देता। कई बार तो कई मरीज मानसिक संतुलन खो देते हैं।

ये बात छत्तीसगढ़ मनोचिकित्सक संघ और जनरल हॉस्पिटल स्पेशेलिटी सेक्शन इंडियन साइकेट्रिक सोसायटी के तत्वावधान में एक दिवसीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कही। कार्यशाला का विषय था- 'साइकेट्री इशूज इन सूपर स्पेशेलिटीज।' कार्यशाला में पहुंचे एजे मेडिकल कॉलेज के प्रो. डॉ. रविश थुंगा ने कहा कि युवा नाक, कान की सर्जरी करा रहे हैं, ताकि वे बेहतर दिख सकें, लेकिन इसका दुष्परिणाम भी बहुत आ रहा है।

कार्यशाला में मिरगी तथा मनोरोग, ट्रांसप्लांट एवं मनोरोग, कॉस्मेटिक सर्जरी और मनोरोग एवं गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती मरीजों में होने वाले मनोरोग पर विशेषज्ञों ने बात की। इस अवसर पर आयुष विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. आभा सिंह ने कार्यशाला का प्रारंभ किया। मौके पर भारतीय मनोचिकित्सक संघ की अध्यक्ष डॉ. रजनी चटर्जी, छत्तीसगढ़ संघ एवं भारतीय मनोचित्सिक संघ के तत्वावधान में डॉ. प्रमोद गुप्ता, डॉ. मनोज साहू, डॉ. अशोक त्रिवेदी, डॉ. मैनाक और डॉ. घोरमोड़े मौजूद रहे।

बताए मनोरोग होने के कारण

- काम में अधिक तनाव और पर्याप्त नींद का अभाव।

- समय पर भोजन न लेना, शरीर में ग्लूकोज की मात्रा की कमी।

- अत्यधिक दवाई के सेवन के कारण।