रायपुर। शहर के दो श्मशान घाट पर अत्याधुनिक अन्त्येष्टि संयंत्र (लकड़ी आधारित) अगले दो माह में लग जाएंगे। इस संयंत्र में लकड़ी की खपत एक चौथाई हो जाएगी। जब लकड़ी कम जलेगी तो प्रदूषण भी कम होगा। रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने मई 2018 में इसका प्रस्ताव तैयार किया था। टेंडर निकाला और आचार संहिता हटते ही वर्कऑर्डर जारी कर दिया। देवेंद्र नगर और मारवाडी श्मशान घाट में जमीन भी चयनित कर ली गई है।

स्मार्ट सिटी के प्रभारी नोडल अधिकारी बीआर अग्रवाल ने 'नईदुनिया' को बताया कि यह संयंत्र पूरी तरह से मॉडर्न वुड बेस्ड ट्रेडिसनल क्रिमिनेशन सिस्टम (आधुनिक लकड़ी आधारित शवदाह) पर आधारित है। इसमें हिंदू संप्रदाय के लोगों को सभी कर्मकांड करने का अवसर रहेगा। हिंदू धर्म के संस्कारों के मुताबिक अंत्येष्टि के समय अपनाए जाने वाले रीति-रिवाज व कर्मकांड जैसे चिता सजाना, मुखाग्नि, कपाल क्रिया सहित अन्य परंपराएं पूरी की जाती हैं, वह परिवार कर सकेगा। दाह संस्कार के बाद पूजन व पवित्र नदियों में प्रवाहित करने के लिए अस्थियां भी एकत्र कर दी जाएंगी।

प्रयोग सफल रहा तो महादेवघाट, शंकर नगर, कोटा आदि शहर के बड़े श्मशानघाट में मॉडर्न वुड बेस्ड ट्रेडिसनल क्रिमिनेशन सिस्टम लगाया जाएगा। गौरतलब है कि पूर्व में आरडीए ने मारवाड़ी श्मशानघाट में शवदाह के लिए मशीन लगाई थी। यह इलेक्ट्रानिक थी, लेकिन लोगों ने इसका इस्तेमाल नहीं किया। तर्क दिया गया कि हिंदू रीति-रिवाज के सभी कर्मकांड पूरे नहीं हो पा रहे थे। इस्तेमाल न होने से इसका रख-रखाव नहीं हुआ और यह बिगड़ी हालत में पड़ी है।

धुआं छोड़ा जाएगा 100 फीट ऊपर

शवदाह के समय निकलने वाले धुएं को फिल्टर कर चिमनी के जरिए सौ फीट ऊपर छोड़ा जाएगा,जिससे आसपास का क्षेत्र प्रदूषण से मुक्त रहेगा। एक आंकड़े के मुताबिक दोनों ही श्मशानघाट में रोजाना 12 से 15 शवों का अंतिम संस्कार होता है। स्थानीय लोगों ने इस दौरान होने वाले प्रदूषण को लेकर शिकायत भी की है। मारवाडी श्मशानघाट के मैनेजर रविकांत साहू ने 'नईदुनिया' को बताया कि इस नए सिस्टम को प्रमोट करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

ऐसे है शहर के लिए फायदेमंद

पर्यावरण प्रदूषण होगा कम- एक दाहसंस्कार में चार क्विंटल लकड़ी लगती है। दो घंटे तक चिता जलती है और यह पर्यावरण को खासा प्रदूषित करती है। आसपास के लोग भी परेशान होते हैं। संयंत्र से समस्या खत्म होगी। धुआं 100 फीट ऊपर छोड़ा जाएगा।

आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा परिवार पर- एक क्विंटल लकड़ी की कीमत 800-1000 रुपये तक है। यानी की सिर्फ लकड़ी की ही लागत चार हजार रुपये। यह परिवार पर आर्थिक बोझ डालती है। नए संयंत्र में एक क्विंटल लकड़ी लगेगी। आर्थिक बोझ चार गुना कम होगा।

शेड बनाएगी कंपनी, पांच साल तक रख-रखाव भी करेगी

जिस कंपनी को यह वर्क ऑर्डर मिला है, संयंत्र का निर्माण वह खुद करती है। कंपनी न सिर्फ संयंत्र लगाएगी, बल्कि पूरा शेड भी विकसित करके देगी। पांच साल तक रख-रखाव भी करेगी। एक संयंत्र लगाने की लागत 45 लाख रुपये है।

दो महीने में लग जाएगा संयंत्र

यह प्रोजेक्ट पर्यावरण की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है। हर किसी के लिए पर्यावरण प्रदूषण चिंता का बड़ा विषय है। स्मार्ट सिटी, निगम की कोशिश है कि जैसे भी हो प्रदूषण को कम किया जाए। - रंजत बंसल, कार्यपालन अभियंता एवं प्रभारी नोडल अधिकारी, स्मार्ट सिटी लिमिटेड