छतरपुर। राजनगर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा प्रत्याशी और युवा नेतृत्व अरविंद पटैरिया के सामने चुनाव मैदान में दो ऐसे प्रत्याशी सामने खड़े हैं, जिनसे अगर क्षेत्र के लोग विकास की उम्मीद लगाएंगे तो वह केवल कोरा भ्रम होगा। एक राजमहल का राजा हैए जो लगातार तीन बार का विधायक है। राजपरिवार का कर्ज चुकाने के नाम पर 15 साल पहले छतरपुर से विधायक बना और पांच साल कुछ नहीं किया। अगले चुनाव में वहां के लोगों को छलकर राजनगर सीट पर आ गया। नवगठित राजनगर विधानसभा से चुनाव लडक़र नातीराजा ने इस क्षेत्र के लोगों को विकास की उम्मीदें जगाईं, लेकिन बदले में इस क्षेत्र को भुखमरी, गरीबी, उपेक्षा और पिछड़ापन मिला। हर बार विधायक का एक ही बहाना होता है कि प्रदेश में हमारी सरकार नहीं है। अब अगर इस बार भी विक्रम सिंह नातीराजा को लोग राजपरिवार का कर्ज चुकाने के नाम पर वोट करते हैंए तो फिर वही हाल होगा इस क्षेत्र का। क्योंकि उनकी सरकारी प्रदेश में आने वाली नहीं है। उन्हें भी परेशान नहीं होना पड़ेगा। अब दूसरे प्रत्याशी की बात करें तो नितिन चतुर्वेदी बंटी भैया हैं जो अपने तीन पीढिय़ों को कांग्रेस से मिले सम्मान को भुलाकर निहित स्वार्थों के लिए कांग्रेस छोडक़र सपा में शामिल हो गए। जो बंटी मुंह में चांदी की चम्मच डालकर इकलौते चिराग के रूप में पैदा हुआ हैए उसमें आम जनमानस की समस्याओं को जानने.समझने के लिए कितनी समझ होगी। यह कहने की आवश्यकता नहीं है। इसलिए राजनगर विधानसभा क्षेत्र के लोगों के लिए यह चेहरा भी किसी काम का नहीं है। अब तीसरा प्रत्याशी अरविंद पटैरिया हैए जिसे भाजपा ने केवल इसलिए टिकट दियाए क्योंकि उसे जनता के दुख.दर्द और तकलीफ की समझए जानकारी और अहसास है। उनसे बेहद करीब से जनता की पीड़ा न सिर्फ देखी.सुनी बल्कि महसूस भी की है। भाजपा ने अरविंद पटैरिया के रूप में राजनगर क्षेत्र का दबा.कुचला, पीडि़त.शोषित समाज का चेहरा देखा। तभी पार्टी के बड़े चेहरों को दरकिनार करते हुए ऐसे युवा को राजनगर क्षेत्र की सेवा के लिए उतारा, जिसकी मेहनत, काम और व्यवहार ही उसकी पहचान है। अब यह राजनगर क्षेत्र के लोगों को तय करना होगा कि वह राजा.राजवाड़े के उपकार के बदले राजनगर क्षेत्र को फिर से दुर्भाग्य के हाथ में देना चाहेंगे या जाति के आधार पर एक रहीशजादे इकलौते चिराग को चुनना चाहेंगे। या फिर भाजपा को यहां से जिताकर इस क्षेत्र को विकास की मुख्य धारा में लाना चाहेंगे।