खजुराहो। राजनगर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा प्रत्याशी अरविंद पटैरिया जिस तरीके से दिन-रात कड़ी मेहनत करके लोगों के बीच जनसंपर्क कर रहे हैं*, उसे देख-सुनकर किसी का भी कलेजा मुंह तक आ सकता है और हर किसी की छाती फट जाती है। अरविंद का मुकाबला उन लोगों से हैं, जो रात 10 बजे तक जनसंपर्क खत्म करके अपने महलों और हाउसों में कैद हो जाते हैं। लेकिन अरविंद पटैरिया का जनसंपर्क रात 2 बजे तक भी जारी रहता है। गांवों में लोग उनका इंतजार करते नहीं थकते हैं। दिनभर की थकान से चूर अरविंद का पड़ाव गांव में ही होता है। खुद के प्रचार वाहन में रखे पतले से गद्दे और चादर पर निढाल होकर अरविंद गिर पड़ता है। तो से ढाई घंटे की नींद लेने के बाद सुबह 6 बजे फिर उठकर नहा-धोकर तैयार होकर फिर चुनावी जनसंपर्क पर अरविंद निकल पड़ते हैं। 
जिले की किसी भी सीट का प्रत्याशी इतनी मेहनत शायद ही कर रहा हो। हर प्रत्याशी जनसंपर्क के बाद या तो अपने पैर दबवाता है या फिर पैरों की सिंचाई करवाता होगा। या फिर कोई और तरीके निकालता होगा। लेकिन अरविंद के पास केवल हौसले की ताकत होती है, जिसके बूते वह सुबह होते ही अपने थके पैरों पर खड़ा होकर चल पड़ता है राजनगर क्षेत्र की भोली-भालि उस जनता को समझाने जो आज भी राजमहल के खूंटे से अपनी तकदीर बांधकर रह गए हैं। अरविंद के पास न परिवार का ऐसा कोई सपोर्ट है कि वे उसके बदले लोगों से वोट मांगते घूमे। दिनभर में उसके बूढ़े माता-पिता का फोन सहयोगियों के पास आता है और पूछ लेते हैं भईया कैसा है, उसने खाना खाया या नहीं, अम्मा कहती है भईया देखो खाना समय से खा लईयो और अच्छे से सो लईयो, तबियत खराब न कर लईयो। अरविंद उन्हें हर दिन दिलासा दे देता है कि खाना खा लिया है, सोने जा रहे हैं। लेकिन कोई-कोई दिन ऐसा होता है जब अरविंद को दिनभर में एक निवाला भी नसीब नहीं होता। तो किसी दिन चाय-नाश्ता में ही पूरा दिन निकल जाता है। पार्टी के विश्वास पर खरा उतरने और राजनगर विधानसभा क्षेत्र को राजशाही की मानसिक गुलामी से आजाद कराने के लिए अरविंद पटैरिया ने जो संकल्प लिया है, उसके लिए वह छाती फाड़ देने वाली मेहनत कर रहा है।