भोपाल। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथारिटी ऑफ इंडिया (FSSI) ने स्टिकर लगे फलों को स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह बताया है। अथारिटी ने आम लोगों को ऐसे फल नहीं खाने की सलाह दी है। वजह, स्टिकर में लगी चिपकाने वाली चीज सेहत के लिए नुकसानदेह है।

इसके बाद भोपाल में खाद्य एवं औषधि प्रशासन का अमला भी सक्रिय हो गया। रविवार को पिपलानी इलाके में स्टिकर लगे सेव हटाने के निर्देश दिए गए। फल बिक्रेताओं से पूछताछ में सामने आया है कि दिल्ली से रोजाना करीब तीन ट्रक स्टिकर लगे फल पुराने भोपाल के बड़े व्यापारियों के यहां आते हैं। इनमें सबसे ज्यादा मात्रा सेव की है। सोमवार से शहर के प्रमुख बाजारों में फलों की दुकानों की जांच की जाएगी। साथ ही स्टिकर हटाने के निर्देश दिए जाएंगे।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी अरुणेश पटेल ने रविवार को पिपलानी इलाके की कुछ दुकानों की जांच की। इस दौरान सेव में स्टिकर मिले। फल बेचने वालों को स्टिकर हटाने और सोमवार से बिना स्टिकर वाले फल रखने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी डीके वर्मा ने कहा कि एफएसएसएआई की सलाह के बाद दुकानों की जांच शुरू की गई है। सोमवार को करोंद सब्जी मंडी, न्यू मार्केट और बिट्टन मार्केट में जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्टिकर मिलने पर की जाने वाली लीगल कार्रवाई के संबंध में निर्देश अभी एफएसएसआई से नहीं मिले हैं। व्यापारियों को समझाइश दी जा रही है कि वे स्टिकर न लगाएं। जहां से सामान आता है वहां भी मना करें। ऐसा नहीं करने पर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि फलों के थोक व्यापारियों को एक-दो दिन के भीतर निर्देश जारी कर दिए जाएंगे।
क्या है नियम

- फलों के ऊपर वैक्स करना और स्टिकर लगाना नियम विरुद्घ है।
- फलों के वाक्स पर फल संबंधी जरूरी जानकारी लिखना आवश्यक है।

- खाद्य सामग्री के पैकेट पर बैच नंबर, पैकिंग तारीख और कब तक खा सकते हैं, यह लिखना जरूरी है। उपभोक्ताओं को भी यह देखकर खरीदना चाहिए।
इनका कहना है

एडवाइजरी जारी होने के बाद शहर में भी जांच शुरू कर दी है। पिछले दो साल में फलों और सब्जियों के करीब 35 नमूने लिए गए थे। किसी में हानिकारक केमिकल या वैक्स नहीं पाया गया है। सेव के दो नमूनों में वैक्स मिली थी, पर वह हानिकारिक श्रेणी की नहीं थी - डीके वर्मा, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी